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हम एडवांस हैं ---निर्मला सिंह गौर की कविता

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दिन हुआ सरपट हिरन रातें नशीली हो गयीं

माँ के चहरे की लकीरें और गहरी हो गयीं

उम्र छोटी पड़ गयी और रास्ते लम्बे हुए

राह में कुछ यात्रियों की म्याद पूरी हो गयी |

गाँव का नटखट कन्हैया हो गया जल्दी बड़ा

और राधा देखकर टीवी हठीली हो गयी

हो गये दुर्बल सभी अर्जुन परीक्षा काल में

बैग ढो ढो कर सभी की पेंट ढीली हो गयी |

पद्मिनी निकलीं महल से चल पड़ी हैं रेम्प पर

और अलाउद्दीन दे रहे हैं अंक परफोर्मेंस पर

दे रहीं सवित्रियाँ अब अर्जियां डाईवोर्स की

सत्यवानो के घरों में कमी इनकम सोर्स की |

पी रहे हैं चरस गांजा गाँव के प्रहलाद अब

हिरणाकश्यप को है टेंसन पुत्र के बर्ताव पर

दे दिया वनवास सीता राम ने माँ बाप को

और श्रवण न कर सके एडजेस्ट अपने आप को

खुल गये वृद्धआश्रम हम बोझ को क्यों कर रखें

ये भी है बिजनेस, सम्हालो आप मेरे बाप को |

मार डाला पीट कर अर्जुन ने द्रोणाचार्य को

कोर्ट ने दी क्लीनचिट इस क्रूरतम संहार को

रो रहा है न्याय ओर कानून भी लाचार है

संस्कारों की दशा, दयनीय सच की हार है

हर तरफ़ रंगत अलग है, आधुनिकता छाई है

आगे बढ़ते हैं कुआ है, पीछे हटते खाई है |

है बड़ा सुंदर हमारा देश हम एडवांस हैं

या विदेशी ट्यून पर हम कर रहे बस डांस हैं |

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Imam Hussain Quadri के द्वारा
November 17, 2013

जितनी भी तारीफ कि जाय कम है और ये क्यों हो रहा है इसका भी बहुत गम है आपकी हर बातों में बहुत ही दम है . धन्यवाद

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
November 17, 2013

धन्यबाद इमाम हुसैन जी , सादर शुभ कामनाएं | निर्मला सिंह गौर

yogi sarswat के द्वारा
November 20, 2013

जितने प्रफ्फुलित करते हैं आपके शब्द उतनी ही गहरी चोट भी करते हैं समाज पर ,उसकी बदलती दशा और दिशा पर ! बहुत सुन्दर ! पी रहे हैं चरस गांजा गाँव के प्रहलाद अब हिरणाकश्यप को है टेंसन पुत्र के बर्ताव पर दे दिया वनवास सीता राम ने माँ बाप को और श्रवण न कर सके एडजेस्ट अपने आप को खुल गये वृद्धआश्रम हम बोझ को क्यों कर रखें ये भी है बिजनेस, सम्हालो आप मेरे बाप को | अत्यंत सार्थक शब्द !

Mann Ki Kawita के द्वारा
November 20, 2013

बहुत सुंदर है…………….रचना आपकी

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
November 20, 2013

सुन्दर-समसामयिक रचना !बधाई !!

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
November 20, 2013

धन्यवाद विजय गुंजन जी | सादर , निर्मला सिंह गौर

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
November 20, 2013

बहुत धन्यवाद सारस्वत जी ,आपके विचार मेरे लिए अमूल्य हैं | सादर, निर्मला सिंह गौर

Birdie के द्वारा
October 17, 2016

Well I guess I don’t have to spend the weekend fiugnirg this one out!


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