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दर्द का तन्हा सफ़र है ---निर्मलासिंह गौर की गज़ल

Posted On: 19 Jan, 2014 Others में

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दर्द का तन्हा सफ़र है
और धुंधुली सी नज़र है
रास्ते  अंजान से हैं
भटक जाने का भी डर है …दर्द का तन्हा सफ़र है |
रोज़ के कुछ खास गम हैं
फिर भी औरों से तो कम हैं
दिल तस्सल्ली दे रहा है
आंखें देखो फिर भी नम हैं
किस से  अपना दर्द बांटे
ये तो बेगाना शहर है …दर्द का तन्हा सफ़र है |
तुम अकेले दूर मंजिल
हमसफ़र की है ज़रूरत
अपने दामन को बचाना
खार हैं फूलों की सूरत
मोम के हैं पांव नाज़ुक
और शोलों की डगर है …दर्द का तन्हा सफर है |
हाथ से फिसले हुए पल
लौट कर आते नहीं हैं
और उनकी मीठी यादें
आप बिसराते नहीं हैं
गुज़रे लम्हे याद करके
क्यों भला ये आँखे तर हैं…दर्द का तन्हा सफ़र है |

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11 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
January 20, 2014

बहुत अच्छी गजल है.आप को बधाई.ये पंक्तियाँ बहुत अच्छी लगीं- हाथ से फिसले हुए पल लौट कर आते नहीं हैं और उनकी मीठी यादें आप बिसराते नहीं हैं गुज़रे लम्हे याद करके क्यों भला ये आँखे तर हैं…दर्द का तन्हा सफ़र है |

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
January 20, 2014

आभार सदगुरुजी ,जागरण जंक्शन पर कुछ दिन पहले ही दाखिला लिया  है ,आप सबसे बहुत सीखने को मिलेगा . सादर , निर्मला सिंह गौर

ranjanagupta के द्वारा
January 20, 2014

निर्मला जी !बहुत सुन्दर कविता !और मार्मिक भाव !बधाई !!

sanjay kumar garg के द्वारा
January 23, 2014

भाव पुरन सुन्दर कविता आदरणीया गौर जी!

Rudra Pratap Singh के द्वारा
January 24, 2014

काफ़ी ह्र्दय-स्पर्शी गजल है । बेहतरीन ।

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
January 24, 2014

 आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार  संजय जी . सादर , निर्मला सिंह गौर

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
January 24, 2014

बहुत आभार रूद्र प्रताप जी , सादर , निर्मला सिंह गौर

रोज़ के कुछ खास गम हैं फिर भी औरों से तो कम हैं दिल तस्सल्ली दे रहा है आंखें देखो फिर भी नम हैं किस से अपना दर्द बांटे ये तो बेगाना शहर है …वाह! बहुत उम्दा गज़ल है दर्द का तनहा सफ़र..हार्दिक शुभकामनाये..खुश रहे सलामत रहे..आपकी कलम यूँ ही नयी इबारतें लिखती रहे दुआए दिल से..

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
February 6, 2014

बहुत आभार शिल्पाजी आपका ,आपकी आत्मीयता के सामने मै नत मस्तक हूँ ,मेरी शुभ कामनाएं . सादर निर्मल

yamunapathak के द्वारा
March 3, 2014

बहुत ही सुन्दर

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 3, 2014

यमुना जी सादर आभार .


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