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क्यों कहे हैं आपने ......निर्मला सिंह गौर की कविता

Posted On: 21 Jan, 2014 Others,कविता,Hindi Sahitya में

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बज उठे हैं धड्कनो में प्रेम के नुपुर
क्यों कहे हैं आपने अपनत्व वाले स्वर
झील के स्तब्ध जल में हो गयी हलचल
क्यों कहे हैं आपने  अपनत्व वाले स्वर |

क्यों दिखाई मरुस्थल को नीर की गगरी
किसलिए छाई गगन पर जल भरी बदरी
क्यों भला त्रश्णित धरा को कर दिया शीतल
क्यों कहे हैं आपने अपनत्व वाले स्वर |

ये विखंडित मूर्ति की आराधना कैसे
घोर निर्जन में ये तप व्रत साधना कैसे
क्यों भला अभिषप्त पाहन का हुआ आदर
क्यों कहे हैं आपने अपनत्व वाले स्वर |

मन के स्पंदन की वीणा हो गयी झंकृत
आस के निष्प्राण पंछी हो गए जीवित
कल्पना की तितलियाँ उड़ने को हैं तत्पर
क्यों कहे हैं आपने अपनत्व वाले स्वर |

बिछ गए हैं पुष्प पथ पर  पग हुए गर्वित
हो गयी संध्या सुगन्धित,  दीप आलोकित
छा गए हैं छितिज पर आबीर के बादल
क्यों कहे हैं आपने अपनत्व वाले स्वर |

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
January 21, 2014

सुन्दर भाबपूर्ण प्रस्तुति . बढ़िया है आभार मदन कभी इधर नही पधारें

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
January 22, 2014

धन्यबाद मदन जी , .

sanjeevtrivedi के द्वारा
April 2, 2014

बहुत सुन्दर पंक्तियाँ है ….

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 2, 2014

बहुत आभार संजीव आपको प्रतिक्रिया के लिए ,ब्लॉग पर आपका हार्दिक अभिनन्दन.


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