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मै अकेली जा रही थी ---निर्मला सिंह गौर

Posted On: 18 Mar, 2014 Others में

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मै अकेली जा रही थी ज़िन्दगी की राह में

पर मुझे खिलते हुए फूलों ने आकर्षित किया

बस ज़रा सा ठहर कर मैंने निहारा था उन्हें

मैंने देखा मेरा दामन खुशबुओं से भर गया |

.

मै अकेली जा रही थी ज़िन्दगी की राह में

पर मुझे बहते हुए पानी ने आकर्षित किया

बस ज़रा सा ठहर कर मैंने उछाला था उसे

मैंने देखा मेरा दामन सीपियों से भर गया |

.

मै अकेली जा रही थी ज़िन्दगी की राह में

पर मुझे रोते हुए बच्चों ने आकर्षित किया

बस ज़रा सा प्यार से  मैंने दुलारा  था उन्हें

मैंने देखा मेरा दामन आंसुओं से भर गया |

.

मै अकेली जा रही थी ज़िन्दगी की राह में

पर मुझे असहायों की आहों ने आकर्षित किया

बस ज़रा सी  देर को मेरा सहारा था उन्हें

मैंने देखा मेरा दामन आशीषों से भर गया |

.

मै अकेली अब नहीं हूँ ज़िन्दगी की राह में

खुशबुएँ हैं, सीपियाँ हैं, आसूं हैं, आशीष हैं

उम्र इनके साथ गुज़रेगी बड़े आराम से

हर क़दम पर तज़ुर्वे हैं, हर क़दम पर सीख हैं |

हर कदम पर तज़ुर्वे हैं, हर क़दम पर सीख हैं ||

निर्मला सिंह गौर



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27 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ritu Gupta के द्वारा
March 18, 2014

सच्च में ज़िंदगी का हर पल हर लम्हा सिखा देता है जीना खूबसूरती से लिखी कविता

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
March 19, 2014
Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 19, 2014

ज़िन्दगी में एक बार सबको ब्रद्ध आश्रम देखने अवश्य जाना चाहये,मुझे ख़ुशी हुई कि आपने मेरी कविता के मर्म को समझ कर प्रतिक्रिया दी,सादर आभार आदरणीय सुरेन्द्र जी .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 19, 2014

रितुजी आपके लिखे शब्द ही कविता का मर्म हैं ,तत्परित प्रतिक्रिया के लिए सादर आभार .

sanjay kumar garg के द्वारा
March 19, 2014

“मै अकेली अब नहीं हूँ ज़िन्दगी की राह में खुशबुएँ हैं, सीपियाँ हैं, आसूं हैं, आशीष हैं” बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति! वास्तव में जिंदगी की ये ही सबसे अनमोल पूजीं हैं, जो कभी साथ नहीं छोड़ती! सुन्दर अनुभवी-अभिव्यक्ति के लिए बधाई! आदरणीया निर्मला जी!

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 19, 2014

सच कहा संजय जी कोई व्यक्ति रातोंरात अमीर बन सकता है पर अनुभवी नहीं,और अनुभव कोई चुरा भी नहीं सकता,बहुत बहुत धन्य वाद एवं सादर आभार .

sadguruji के द्वारा
March 21, 2014

मै अकेली अब नहीं हूँ ज़िन्दगी की राह में खुशबुएँ हैं, सीपियाँ हैं, आसूं हैं, आशीष हैं उम्र इनके साथ गुज़रेगी बड़े आराम से.बहुत अच्छी कविता.आपको बधाई.यदि मन में सृजनशीलता का भाव है तो अकेलापन भी एक वरदान बन सकता है.अकेलापन एक नैसर्गिक और शाश्वत सत्य है,जिसमे व्यक्ति अपने जीवन का ज्यादातर समय विचरण करता है.एकांत से व्यक्ति आता है और एक दिन एकांत में समा जाता है.

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 21, 2014

आपकी सार गर्वित प्रतिक्रिया पाकर मेरी कविता धन्य हो गई ,आदरणीय सदगुरूजी ,बहुत बहुत आभार .

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
March 24, 2014

निर्मला जी बहुत ही निर्मल भावों को अभिवयक्ति प्रदान की है आपने .बधाई

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 24, 2014

आपने ब्लॉग पर जाकर कविता पर अपनी प्रतिक्रिया दी ,बहुत बहुत आभार योगी सारस्वत जी ,अनेक शुभ कामनाएं ,सादर

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 24, 2014

शिखाजी मेरी भावनाओं की अभिव्यक्ति पर आपके विचार पढ़ कर उत्साह वर्धन हुआ ,आभार आपका .

jlsingh के द्वारा
March 25, 2014

मै अकेली अब नहीं हूँ ज़िन्दगी की राह में खुशबुएँ हैं, सीपियाँ हैं, आसूं हैं, आशीष हैं उम्र इनके साथ गुज़रेगी बड़े आराम से हर क़दम पर तज़ुर्वे हैं, हर क़दम पर सीख हैं | हर कदम पर तज़ुर्वे हैं, हर क़दम पर सीख हैं || जिसने ये दुनिया बनाई विविधताओं से भरी बेसहारा है कोई तो थामने वाले भी हैं आपका बहुत बहुत अभिनन्दन आदरणीया निर्मला जी !

ranjanagupta के द्वारा
March 25, 2014

बहुत सुन्दर भावनत्मक ,और जीवन की सच्चाई से अवगत कराती कविता !!बहुत बधाई निर्मला जी !!

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 25, 2014

आपकी प्रतिक्रिया पाकर मन प्रफुल्लित हुआ रंजना जी ,बहुत बहुत सादर आभार .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 25, 2014

आपके सम्मान की अनुग्रहीत हूँ आदरणीय जवाहर सिंह जी, एक संवेदन शील व्यक्ति ही दूसरों के दुःख को समझ सकता है और एक संवेदन शील व्यक्ति ही कवि और लेखक होता है और ज़िन्दगी भर दूसरों के दुःख देख कर दुखी रहता है ,जो उसके लेखन में परिलक्षित होता है,आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए अमूल्य है ,सादर आभार .

vaidya surenderpal के द्वारा
March 25, 2014

मै अकेली अब नहीं हूँ ज़िन्दगी की राह में खुशबुएँ हैं, सीपियाँ हैं, आसूं हैं, आशीष हैं उम्र इनके साथ गुज़रेगी बड़े आराम से हर क़दम पर तज़ुर्वे हैं, हर क़दम पर सीख हैं | हर कदम पर तज़ुर्वे हैं, हर क़दम पर सीख हैं || बहुत सुन्दर भावपूर्ण कविता…….. !!बहुत बधाई निर्मला जी !!

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 25, 2014

आदरणीय सुरेन्द्र पाल जी नमस्कार ,आपने कविता पर प्रतिक्रिया देकर मेरी लेखनी को गति प्रदान की ,आभारी हूँ

Pankaj Kumar Mishra Vatsyayan के द्वारा
March 31, 2014

जीवन के पल पल को ऐसे कितनों ने स्वीकार किया है सुंदरता के हीरे से कविता का श्रृंगार किया है इतनी उत्तम दृष्टी यहाँ कितनों को मिली है पता नहीं पर ईश्वर नें वह दृष्टि आपको लगता है उपहार दिया है अति उत्तम विचार, जीवन दर्शन

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 31, 2014

आपकी पंक्तियाँ बहुत सुंदर लगीं पंकज जी, मेरी कविता का मान बढ़ गया ,बहुत बहुत आभार आपका .सादर.

ADVOCATE VISHAL PANDIT के द्वारा
April 2, 2014

भई वाह बहुत बढ़िया, बेहद खूबसूरत रचना……………. बधाई हो आपको इतनी सुन्दर रचना के लिए.

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 2, 2014

विशाल जी बहुत आभार , आपकी प्रतिक्रिया बहुत अच्छी लगी,ब्लॉग पर आपका स्वागत है ,अनेकानेक शुभ कामनाएं

kavita1980 के द्वारा
April 7, 2014

बहुत सुंदर

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 8, 2014

प्रतिक्रिया के लिए आभार कविता जी .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 8, 2014

धन्यवाद कविता जी .

deepak pande के द्वारा
July 13, 2014

बस ज़रा सी देर को मेरा सहारा था उन्हें मैंने देखा मेरा दामन आशीषों से भर गया YE PANKTIYAAN DIL KO CHHOO GAYEE AADARNIYA NIRMALA DIDI मै अकेली अब नहीं हूँ ज़िन्दगी की राह में खुशबुएँ हैं, सीपियाँ हैं, आसूं हैं, आशीष हैं WAAH YE SAB PADKAR MUJHE BHEE KUCHH SAKARATMAK LIKHNE KO PROTSAHAN MILTA HAI

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 13, 2014

बहुत ख़ुशी हुई की मेरी रचना से आप को प्रेरणा मिली है मै प्रतीक्षा कर रही हूँ दीपक भाई ,जल्द ही लिखकर ब्लॉग पर डालिए,आप बहुत अच्छा लिखते है ,प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार .


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