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चले आये तुम ---निर्मला सिंह गौर

Posted On: 3 Apr, 2014 Others,कविता,Celebrity Writer में

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वक़्त-ए-गर्दिश में हमने पुकारा तुम्हें
जान जोख़िम में कर के चले आये तुम
हमने फूलों का रस्ता बताया मगर
देखा काँटों पे चल के चले आये तुम |
.
जब बहारें महकने लगीं थीं यहाँ
तब पुकारा तो तुम थे न जाने कहाँ
जब खिज़ां ने यहाँ एक रख्खा क़दम
तो ये गुलशन बचाने चले आये तुम |
.
जब मदद के लिए हमने दामन किया
तुमने सुख चैन अपना सभी भर दिया
जब हमें अपनी सासों के लाले पड़े
उम्र दामन में भर के चले आये तुम |
.
ज़िन्दगी भर मिले और बिछुड़ते रहे
फूल खिलते रहे और बिखरते रहे
दाना पानी हमारा जहां से उठा
अश्क आँखों में भर के चले आये तुम |
.
निर्मला सिंह गौर

.



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23 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
April 3, 2014

दाना पानी हमारा जहां से उठा अश्क आँखों में भर के चले आये तुम | बहुत ही भावनात्मक अभिव्यक्ति .बधाई निर्मला जी .

Ashutosh Shukla के द्वारा
April 3, 2014

लाज़वाब निर्मला मैम….बहुत पसंद आयी… बहुत सीखने को मिला..

jlsingh के द्वारा
April 4, 2014

ज़िन्दगी भर मिले और बिछुड़ते रहे फूल खिलते रहे और बिखरते रहे दाना पानी हमारा जहां से उठा अश्क आँखों में भर के चले आये तुम | बहुत ही सुन्दर! आदरणीया!

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 4, 2014

आभार आपका जवाहर सिंह जी ,ब्लॉग पर सदैव अभिनन्दन है,सादर

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 4, 2014

खुश रहो आशुतोष ,अच्छा लगा की कविता पसंद आई ,प्रतिक्रिया के लिए आभार हार्दिक अभिनन्दन .

kavita1980 के द्वारा
April 7, 2014

दिल छू गई आपकी कविता –

sadguruji के द्वारा
April 8, 2014

आदरणीया निर्मला सिंह गौर जी,सुप्रभात ! कविता की शुरुआत साधारण है,परन्तु अंतिम चार पंक्तियाँ बहुत बेहतरीन और लाजबाब हैं-ज़िन्दगी भर मिले और बिछुड़ते रहे फूल खिलते रहे और बिखरते रहे दाना पानी हमारा जहां से उठा अश्क आँखों में भर के चले आये तुम |आप को बधाई.

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 8, 2014

धन्यवाद आदरनीय सद गुरूजी आप ने कविता पर सच्ची प्रतिक्रिया दी है ,वास्तव में अंतिम ४ पंक्तियाँ ही विशेष हैं, आपके निष्पक्ष विचारों का सदैव स्वागत है ,सादर शुभ कामनाएं .

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
April 8, 2014

निर्मला जी ..सुन्दर भाव ऐसा होता रहे तो क्या बात है …त्याग चाहत प्रेम सब कुछ समेटे अच्छी रचना … भ्रमर५

deepakbijnory के द्वारा
April 8, 2014

bahut hee खूबसूरत कविता बार बार पड़ने को दिल चाहता है सुंदर विचारों से भरी ek भावनापूर्ण कविता aadarniya nirmala jee

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 8, 2014

आभार दीपकजी ब्लॉग पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 8, 2014

बहुत आभार सुरेन्द्र जी ,कविताएँ भावनाओं का गुलदस्ता ही तो होतीं हैं ,ब्लॉग पर आपका अभिनन्दन है .

Pankaj Kumar Mishra Vatsyayan के द्वारा
April 9, 2014

किसी एक पंक्ति को अच्छी पंक्ति कहूँ, गलत होगाI पूरी रचना प्रेम और समर्पण का भाव अभिव्यक्त करती है I बहुत बहुत बधाई !

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 9, 2014

समर्पण की पराकाष्टा ही सच्चा और निस्वार्थ प्रेम है ,पंकजजी आपने सही पढ़ा ,सादर आभार

sanjay kumar garg के द्वारा
April 11, 2014

“ज़िन्दगी भर मिले और बिछुड़ते रहे फूल खिलते रहे और बिखरते रहे” सुन्दर अभिव्यक्ति आदरणीया निर्मला जी!

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 11, 2014

आपकी प्रतिक्रिया पढ़ कर बहुत अच्छा लगा आदरणीय संजय जी ,हार्दिक अभिनन्दन .

yamunapathak के द्वारा
April 14, 2014

ज़िन्दगी भर मिले और बिछुड़ते रहे फूल खिलते रहे और बिखरते रहे दाना पानी हमारा जहां से उठा अश्क आँखों में भर के चले आये तुम | निर्मला जी उपरोक्त पंक्तियाँ मन को छू गईं.बहुत सुन्दर साभार

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 14, 2014

आपकी सराहना के लिए बहुत आभारी हूँ यमुना जी ,सादर अभिनन्दन .

Ritu Gupta के द्वारा
April 18, 2014

दिल को छू लेने वाली कविता बधाई निर्मला जी

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 18, 2014

आपकी प्रतिक्रिया के लिए सादर आभार रितुजी.

श्वेता के द्वारा
April 21, 2014

हर शब्द एक कशिश लिए हुए …बहुत ही सुन्दर रचना …….

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 23, 2014

श्वेतजी आपने रचना की सराहना की उसके लिए हार्दिक आभार ,ब्लॉग पर आपका अभिनन्दन है .


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