भोर की प्रतीक्षा में ...

कविताएँ एवं लेख

52 Posts

903 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 16670 postid : 733407

मझधार से ... निर्मला सिंह गौर

  • SocialTwist Tell-a-Friend

तूफ़ान में रख्खा चिराग़ जलता रहेगा
बस आप हवाओं के रुख का वेग मोड़ दें
मझधार से निकल के नाव आएगी इस पार
बस आप डूबने का इंतजार छोड़ दें |
.
अपनी ख़ुदी के आप ही खुद ज़ुम्मेदार हैं
क्या आपके बुज़ूद-ए-महल में दरार है ?
कानून का डर आपको सोने नहीं देगा
गर आपकी परछाईं भी क़ुसूर वार है
बस नींद का शुकून तो हासिल तभी होगा
जब आप दंद फंद का आधार छोड़ दें |
.
मझधार से निकल के नाव आएगी इस पार
बस आप डूबने का इंतजार छोड़ दें |
.
ईमान, धर्म, एकता और प्यार मुहब्बत
इंसान की इंसानियत ही है बड़ी दौलत
हिन्दू, मुसलमा, सिख, इसाई सभी भाई
मिलकर रहें तो एकता में होती है ताक़त
इन्सान है भगवान का बेजोड़ नमूना
बस आप सम्प्रदाय की दीवार तोड़ दें|
.
मझधार से निकल के नाव आएगी इस पार
बस आप डूबने का इंतज़ार छोड़ दें |
.
दुनिया तो रंग मंच है हम काठ के पुतले
रिश्तों को निभाने के हैं करतव नपे-तुले
तब तक ही राग द्वेष है ,खुशियाँ या रंज है
जब तक की बंधनों की कसी गांठ ना खुले
इस ज़िन्दगी के मंच पर नायक बने रहें
खलनायकी का बदनुमा किरदार छोड़ दें |
.
मझधार से निकल के नाव आएगी इस पार
बस आप –डूबने का– इंतजार छोड़ दें |
.
निर्मला सिंह गौर



Tags:           

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 4.75 out of 5)
Loading ... Loading ...

42 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ranjanagupta के द्वारा
April 17, 2014

निर्मला जी !बहुत बहुत बधाई !आपका लिखना भी एक कशिश सी छोड़ जाता है !मुझे दो तीन बार पढना पडा ! सादर …!!

sadguruji के द्वारा
April 17, 2014

आदरणीया निर्मला सिंह गौर जी,इस रचना के लिए बधाई.इस रचना में कई विषय एक साथ शामिल हो गए हैं और कविता की स्वाभाविक लय भी कुछ जगह पर टूट गई है.आपने इस कविता को रचने में काफी परिश्रम किया है.अंत में अच्छा संदेश है-इस ज़िन्दगी के मंच पर नायक बने रहें खलनायकी का बदनुमा किरदार छोड़ दें | . मझधार से निकल के नाव आएगी इस पार बस आप –डूबने का– इंतजार छोड़ दें

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 18, 2014

आपने सही कहा , आदरणीय सदगुरुजी ,इस कविता में लय से ज्यादा सन्देश पर तब्ज्जुब दिया है,पूरी कविता मानवीय कमजोरियों पर ध्यानाकर्षण कर रही है .कई लोग अपने नकारात्मक नजरिये के कारण मात खाते हैं,अगर स्वजन घर समय पर न लौट सके तो बुरे ख्याल पहले आते हैं,(मै स्वयं भी थोड़ी सी इस सोच की शिकार हूँ )शीर्षक पंक्तियाँ यही कहतीं हैं —मझधार से निकल के नाव आएगी इस पार …. बाक़ी की कविता आप समझ ही गए होंगे,चरित्र निर्माण ,राष्ट्रिय एकता और अंत में जीवन के बारे में मैंने स्वयं का नजरिया लिखा है.आपके निष्पक्ष विचारों का सदैव स्वागत है , प्रतिक्रिया के लिए बहुत अनुग्रहीत हूँ,सादर

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 18, 2014

आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए बहुत विशेष होती है रंजना जी ,कविता आपकी नज़र पा गई यही बड़ी बात है ,फिर २-३ बार तो क्या कहने …हार्दिक अभिनन्दन आपका .

Ritu Gupta के द्वारा
April 18, 2014

निर्मला जी हमेशा की तरह उम्दा कविता बधाई सच्च में सकारत्मक सोच और खुद में सुधार से दुनिया बदली जा सकती hai

drashok के द्वारा
April 18, 2014

भाव पूर्ण कविता और आशा पूर्ण आपके विचार हैं डॉ अशोक

sanjay kumar garg के द्वारा
April 18, 2014

“तूफ़ान में रख्खा चिराग़ जलता रहेगा बस आप हवाओं के रुख का वेग मोड़ दें मझधार से निकल के नाव आएगी इस पार बस आप डूबने का इंतजार छोड़ दें |” सुन्दर अभिव्यक्ति आदरणीय निर्मला जी!

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 18, 2014

ब्लॉग पर आपका अभिनन्दन है ,आपकी प्रतिक्रिया से उत्साह वर्धन हुआ डॉ.अशोक जी ,सादर आभार

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
April 18, 2014

गंगोयमन के भाव में मन डूब सा गया < नदियों से आप कह दें कि तकरार छोड़ दें !! अत्यंत ही भावप्रवण प्रस्तुति के लिए निर्मला जी अतिरिक्त बधाई स्वीकारें !! पुनश्च !!

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 18, 2014

मेरी हर कविता का मर्म आप समझ लेतीं हैं रितुजी,आपका सादर अभिनन्दन .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 18, 2014

दो पंक्तियाँ इतनी सुंदर हैं, पूरी कविता पढना चाहती हूँ ,कहाँ मिलेगी ?विजय जी आपको बहुत धन्यवाद ,आपका सादर अभिनन्दन .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 18, 2014

बहुत बहुत धन्यवाद संजय जी ,प्रतिक्रिया पा कर उत्साहित हूँ ,सादर आभार .

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
April 19, 2014

दुनिया तो रंग मंच है हम काठ के पुतले रिश्तों को निभाने के हैं करतव नपे-तुले तब तक ही राग द्वेष है ,खुशियाँ या रंज है जब तक की बंधनों की कसी गांठ ना खुले इस ज़िन्दगी के मंच पर नायक बने रहें खलनायकी का बदनुमा किरदार छोड़ दें | .आदरणीया निर्मला जी सुन्दर सन्देश देती अच्छी रचना काश लोग इस पर गौर करें … भ्रमर ५

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
April 19, 2014

बस आप डूबने का इंतजार छोड़ दें |-bahut khoob likha hai aapne nirmala ji .badhai

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 20, 2014

आपकी सराहना का स्वागत है सुरेन्द्र जी ,कविता की यात्रा तभी सफल होती है जब आप जैसे बुद्धि जीवी लोग पढ़ें .बहुत आभार .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 20, 2014

धन्य वाद शिखा जी प्रतिक्रिया के लिए ,आपकी लेखनी गतिमान चलती रहे ,शुभकामनाएं .

deepak pande के द्वारा
April 21, 2014

इस ज़िन्दगी के मंच पर नायक बने रहें खलनायकी का बदनुमा किरदार छोड़ दें | sach aadarniya nirmala jee hum sab kathputliyAAN HEE TO HAIN EESHWAR KE DWARA BANAYEE GAYI BAS PARANTU NAYAK NAHEE AAM INSAAN BANE REHNA HEE KAFI HAI

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 23, 2014

कभी कभी ऐसा लगता है कि हमारे हाथ में कुछ नहीं है,हम कठ पुतली ही हैं ,आपने सच कहा कि इंसान बने रहें यही काफी है ,प्रतिक्रिया के लिए आभार दीपक भाई.

Alka के द्वारा
April 24, 2014

आदरणीय निर्मला जी . सुन्दर रचना |क्या खूब कहा है आपने …. मझधार से निकल के नाव आएगी इस पर , बस आप डूबने का इंतजार छोड़ दें.. बधाई ..

Alka के द्वारा
April 24, 2014

आदरणीय निर्मला जी , सुन्दर शब्दों से रची सुन्दर रचना .. मझधार से निकल के नाव आएगी इस पार , बस आप डूबने का इंतजार छोड़ दे .. बहुत खूब ..सादर…..

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 24, 2014

आपका हार्दिक अभिनन्दन है अलका जी,आपकी सराहना से बल मिला , प्रतिक्रिया के लिए सादर आभार.

sadguruji के द्वारा
April 25, 2014

आदरणीया निर्मला सिंह गौर जी ! सुप्रभात ! सुबह सुबह बेस्ट ब्लॉगर आफ दी वीक के सम्मान के साथ आपको देखा,बहुत ख़ुशी हुई ! आपको बहुत ब्बहुत बधाई ! एक बहुत अच्छा सन्देश-बस नींद का शुकून तो हासिल तभी होगाजब आप दंद फंद का आधार छोड़ दें ! इन्सान है भगवान का बेजोड़ नमूना बस आप सम्प्रदाय की दीवार तोड़ दें ! इस ज़िन्दगी के मंच पर नायक बने रहें खलनायकी का बदनुमा किरदार छोड़ दें ! यूँ ही लिखती रहिये और जनमानस को ऐसे ही सार्थक और शिक्षाप्रद संदेश देते रहिये ! हार्दिक बधाई और शुभकामनाओ सहित !

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 25, 2014

धन्यबाद आदरणीय सद गुरूजी ,पहली पोस्ट आपकी मिली ,आप का आशीर्वाद है भविष्य में भी आपके आशीर्वाद एवं मार्ग दर्शन की अभिलाषा है ,सादर आभार.

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 25, 2014

आदरणीय सम्पादक मंडल (जागरण जंक्शन )साहित्य सेवा के यज्ञ में आपकी निस्वार्थ आहुति सराहनीय है ,आपके मंच ने हिंदी लेखकों को बहुत प्रोत्साहन दिया है| मुझे ब्लोगर ऑफ़ द वीक का सम्मान देने के लिए आपका हार्दिक आभार ,एवं सभी साथियों को उत्साह वर्धन के लिए बहुत बहुत धन्य वाद |

jlsingh के द्वारा
April 25, 2014

आदरणीय निर्मला जी, सादर अभिवादन साथ ही साप्ताहिक सम्मान की बधाई ! विलम्ब के लिए क्षमा चाहूँगा इधर जे जे की साइट में कुछ तकनीकी समस्या दिख रही है मुझे … यह एक कारण है बेहतरीन तो आप लिखती ही हैं दुनिया तो रंग मंच है हम काठ के पुतले रिश्तों को निभाने के हैं करतव नपे-तुले तब तक ही राग द्वेष है ,खुशियाँ या रंज है जब तक की बंधनों की कसी गांठ ना खुले इस ज़िन्दगी के मंच पर नायक बने रहें खलनायकी का बदनुमा किरदार छोड़ दें | आपका बहुत बहुत अभिनंदन!

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 25, 2014

विलम्ब की कोई बात नहीं है जवाहर सिंह जी आप के प्रोत्साहन की शुक्रगुजार हूँ ,आप स्वयं बहुत अच्छे लेखक हैं,आपका सादर आभार

Santlal Karun के द्वारा
April 25, 2014

आदरणीया निर्मला जी, आज-कल ‘जागरण जंक्शन’ पर कम ही आ पाता हूँ | आज ‘साप्ताहिक सम्मान बॉक्स’ से जिज्ञासा वश आप की कविता तक आया, तो कथ्य और शिल्प दोनों की ताजगी अच्छी लगी | यदि व्यक्ति अपनी कमजोरियों पर ध्यान नहीं देगा, तो व्यक्तित्व की न्यूनता-हीनता वर्तमान विषाक्त वातावरण को कैसे दूर कर पायेगी | इस श्रेष्ठ रचनात्मकता के लिए सहृदय साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! — “दुनिया तो रंग मंच है हम काठ के पुतले रिश्तों को निभाने के हैं करतव नपे-तुले तब तक ही राग द्वेष है ,खुशियाँ या रंज है जब तक की बंधनों की कसी गांठ ना खुले” …’बेस्ट ब्लॉगर ऑफ द वीक’ के चयन पर हार्दिक बधाई !

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 25, 2014

आज आपने मेरी कविता पर नज़र डाली और वक्त निकाल कर कुछ प्रेरणात्मक सन्देश भेजा,ये मेरे लिए अमूल्य है ,आदरणीय संतलाल जी ,आपके प्रोत्साहन एवं सराहना की अनुग्रहीत हूँ ,सादर आभार .

deepak pande के द्वारा
April 25, 2014

blogger of the week chune jaane par bahut bahut badhai aadarniya nirmala jee

yamunapathak के द्वारा
April 25, 2014

nirmala jee bahut bahut badhai lines bahut sundar hain.urdu shabd vaise bhee bahut ache lagate hain.

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 25, 2014

ज़र्रा नवाज़ी का शुक्रिया यमुना जी मै खुद भी आपके उम्दा अंदाज़-ए-सुखन की मुरीद हूँ :-)

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 25, 2014

धन्य वाद दीपक भाई आप सब की प्रतिक्रियाओं से लिखने की रूचि बनी रहती है सादर आभार एवं पुरुस्कार की बधाई आपको भी .

nishamittal के द्वारा
April 27, 2014

मेरी जागरण साईट  में कुछ समस्या हो ने के कारण मैं आपकी सुन्दर पोस्ट पर कमेन्ट नहीं दे पा रही थी .हार्दिक बधाई सम्मान हेतु,सुन्दर रचना

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 27, 2014

आपका कमेन्ट कभी भी मिले मेरे लिए हमेशा महत्वपूर्ण है निशा जी आपका सादर आभार .

kavita1980 के द्वारा
April 27, 2014

बहुत व्यस्त रही इधर अभी आपका नाम देखा तो बधाई दिए बिना रहा नहीं गया   बहुत ही सुंदर और सकारात्मक सोच झलकती है आपकी इस कविता में

Pankaj Kumar Mishra Vatsyayan के द्वारा
April 28, 2014

आदरणीय निर्मला जी बेस्ट ब्लागर चुने जाने के लिए बधाई स्वीकार करें। अति उत्तम रचना।

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 28, 2014

धन्यवाद कविताजी ,आपका ब्लॉग पर अभिनंदन है .आपकी नई रचनाओं का इंतजार है ,आभार .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 28, 2014

धन्यवाद पंकजजी ,आपकी प्रतिक्रियाओं और प्रोत्साहन की अनुग्रहीत हूँ ,सादर आभार .

Meenakshi Srivastava के द्वारा
April 29, 2014

निर्मला सिंह गौर ” निश्चित रूप से बेस्ट ब्लॉगर का सम्मान आपको ही मिलना था. इतनी सहजता से .. .. ….अनोखे अंदाज़ से जो आपने – एक भाई चारे की बात …एकता की बात कही उसको पढ़ मैं ही नही हर कोई बेहद खुश हुआ होगा ; तभी…. आपको बहुत- बहुत बधाई निर्मला सिंह जी ! मीनाक्षी श्रीवास्तव

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 30, 2014

मीनाक्षी जी ,आपको भी प्रथम पुरुस्कार प्राप्त करने की हार्दिक बधाई , कविता का मर्म समझ कर जो सराहना के सुंदर शब्द लिखे हैं ये मेरे लिए बड़ा अवार्ड है ,ब्लॉग पर आपका अभिनन्दन है सादर आभार आपका .

pkdubey के द्वारा
May 8, 2014

VERY INSPIRING POEM MADAM.SADAR BADHAI.

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
May 9, 2014

बहुत ख़ुशी यह जान कर हुई कि आपने मेरी बहुत सारी रचनाएँ पढ़ीं और प्रतिक्रिया भी लिखी ,हार्दिक आभार चि.पी.के.दुबे जी .


topic of the week



latest from jagran