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आंगन का वट ---निर्मला सिंह गौर (पर्यावरण दिवस पर )

Posted On: 3 Jun, 2014 Others में

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देखते देखते मेरे आँगन का वट/
चार पत्तों से बढ़कर सघन हो गया /
मै वहीं का वहीँ, उसमे लाखों विहग /
उसका आगोश सारा गगन हो गया|
.
उसके शाखों में थी भोर संगीत मय/
पक्षियों के सुरीले स्वरों का उदय /
माँ के आँचल में शिशु की ज्यों किलकारियां /
झूमे शीतल पवन लेके बलिहारियां |
.
उसकी जड़ ने गिरा कर के दीवार को/
अपनी शक्ति का मुझको इशारा किया/
मै विवश ,वो प्रगति पथ पे संघर्ष रत /
मूक तरु ने मुझे ही नाकारा कहा |
.
मैंने भी फिर प्रयत्नों की पतवार से /
अपने जीवन का उद्देश्य तय कर लिया /
उसको प्रेरक समझ आया उसके निकट/
ये बताने कि क्या क्या फतह कर लिया |
.
किन्तु मेरी नज़र पर बज्र गिर गया /
मैंने ढूंढा वहां, मेरा वट था कहाँ /
उसको लोगों ने कटवा के टुकड़े किया
और ईंधन का सामान तय कर लिया |
.
नीड़ लाखों वहां पक्षियों के पड़े /
अपनी बरबादियों की ब्यथा कह रहे /
मेरे द्रग रो पड़े, ऐसा क्यों हो गया/
मूक तरु तू स्वयं को बचा ना सका |
.
देखते देखते वक्त बीता बहुत /
उसके नन्हें तनय हो गए अंकुरित /
फिर से होगा जवां ,फिर से होगा गठित /
धन्य है आसमाँ ,धन्य आंगन का वट/
धन्य है आसमाँ ,धन्य आँगन का वट |
.
निर्मला सिंह गौर



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39 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
June 3, 2014

निर्मला जी अति सुन्दर कविता हमारी धरती से जुड़ी कविता हैं डॉ शोभा भारद्वाज

June 3, 2014

देखते देखते वक्त बीता बहुत उसके नन्हें तनय हो गए अंकुरित फिर से होगा जवां ,फिर से होगा गठित धन्य है आसमाँ ,धन्य आंगन का वट धन्य है आसमाँ ,धन्य आँगन का वट | aur dhany hai aapki abhivaykti .nice poem

nishamittal के द्वारा
June 4, 2014

सुन्दर भावपूर्ण सार्थक रचना निर्मला जी

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 4, 2014

हार्दिक आभार शालिनी जी ,आपकी सद्भावना मेरे लिए अमूल्य है .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 4, 2014

आदरणीय शोभाजी ,बहुत बहुत धन्यवाद ,आपके शब्द उत्साहवर्धक हैं ,ब्लॉग पर आपका सदैव अभिनन्दन है ,सादर आभार .

sadguruji के द्वारा
June 4, 2014

देखते देखते वक्त बीता बहुत उसके नन्हें तनय हो गए अंकुरित फिर से होगा जवां ,फिर से होगा गठित धन्य है आसमाँ ,धन्य आंगन का वट धन्य है आसमाँ ,धन्य आँगन का वट.बहुत अच्छी और प्रेरक रचना ! आपको बहुत बहुत बधाई !

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 4, 2014

धन्यवाद आदरणीय सद्गुरु जी,आपका ब्लॉग पर सादर अभिनन्दन है .

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
June 4, 2014

मन को छू गयी आपकी रचना .आभार

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
June 5, 2014

बहुत दिनों बाद गीतात्मकता से पूर्ण एक लयात्मक समसामयिक रचना पढ़ने को मिली | निर्मला जी हार्दिक बधाई स्वीकारें !पुनश्च !!

deepak pande के द्वारा
June 5, 2014

बहत खूब बहुत सुन्दर कई दिनों बाद कुछ ऐसा पड़ने को मिला जो दिल को छू गया

Sushma Gupta के द्वारा
June 5, 2014

बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण देश व् संस्कृति से जुडी रचना .. वधाई निर्मला जी …

मनुष्य और वृक्ष के अटूट रिश्ते की कहानी को बहुत ही सुंदर ढंग से व्यक्त किया.. सादर..

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 5, 2014

आपकी रचनाओं का इंतजार है ,विजय जी ,कब पढने को मिलेगी ? इतनी अच्छी प्रतिक्रिया के लिए सादर आभार .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 5, 2014

बहुत बहुत धन्यवाद दीपकजी ,आप जैसे सुधी लेखकों की प्रतिक्रिया का सदैव स्वागत है ,हार्दिक आभार .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 5, 2014

धन्यवाद शिल्पाजी ,मेरी भावनाओं को समझ कर ,सराहने के लिए हार्दिक आभार .

Sushma Gupta के द्वारा
June 6, 2014

निर्मला जी, एक बट-वृक्ष के माध्य्म से अपने जो जीवंत चित्रांकन किया है, पर्यावरण को वचाने हेतु अद्वितीय प्रयास है ..वधाई..

surendra shukl bhramar5 के द्वारा
June 6, 2014

देखते देखते वक्त बीता बहुत उसके नन्हें तनय हो गए अंकुरित फिर से होगा जवां ,फिर से होगा गठित धन्य है आसमाँ ,धन्य आंगन का वट आदरणीया निर्मला जी बहुत सुन्दर सन्देश , खूबसूरत भाव सही समय पर सुन्दर रचना आइये धरती और पर्यावरण को बचाये रखें भमर ५

meenakshi के द्वारा
June 6, 2014

निर्मला जी आपकी “आँगन का वट” बहुत सुन्दर और सत्य को उकेरती सोद्देशीय रचना लगी , हार्दिक शुभकामनाएं !

jlsingh के द्वारा
June 7, 2014

आशावादी सोच बनी रहनी चाहिए …कोई डाल काटे या काटे जड़ हमारे प्रयास से हमारी बगिया हरी रहनी चाहिए ! बहुत सुन्दर कविता निर्मला जी!

pkdubey के द्वारा
June 7, 2014

सादर आभार आदरणीया .आप द्वारा रचित कविता की मुझे प्रतीक्षा रहती है. सादर आभार आप का.

Sushma Gupta के द्वारा
June 7, 2014

निर्मला जी , वृक्ष और मानव का रिश्ता सदियों पुराना है , और सदा ही रहेगा यही सुन्दर अभिव्यक्ति आपकी rachna में भी दिखाई पड़ती है .. वधाई..

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 7, 2014

आदरनीय सुरेन्द्रजी ,आपकी प्रतिक्रिया पढ़ कर अच्छा लगा ,बहुत बहुत आभार ,एवं सादर अभिनन्दन.

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 7, 2014

मीनाक्षी जी आपके शब्द मेरे ह्रदय में उत्साह और प्रेरणा का श्रोत होते है ,बहुत बहुत धन्यवाद एवं आपका सादर अभिनन्दन .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 7, 2014

प्रतिक्रिया पढ़ कर लगता है की कविता किसी साहित्य महिर्षि ने पढ़ी है ,बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय जवाहर लाल सिंह जी .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 7, 2014

चि.परवीन जी बहुत ख़ुशी हुई यह जान कर कि आपको मेरी रचनाओं की प्रतीक्षा रहती है,आप स्वयं बहुत अच्छा लिखते हैं .मेरी अनेक शुभकामनायें एवं आपका हार्दिक अभिनन्दन .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 7, 2014

आदरणीय सारस्वत जी ,आपका हार्दिक आभार एवं मेरे ब्लॉग पर सदैव अभिनन्दन है ,बहुत बहुत धन्यवाद आपका .

Veer Suryavanshi के द्वारा
June 8, 2014

बहत ही सुन्दर कविता है रचना निर्मला जी आपको बधाई देते हुए आपसे निवेदन करूंगा कृपया मेरी इस रचना पर अपने मूल्यवान विचार दे !! http://veersuryavanshi.jagranjunction.com/2014/05/28/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%90-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%a4-2/?preview=true&preview_id=745543&preview_nonce=4056759639

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 8, 2014

आपने पहली बार मेरी रचना पर अपने विचार दिए ,आपका हार्दिक अभिनन्दन है आदरणीय वीरजी ,प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार ,मै अवश्य ही आपकी रचनाओं को पढूंगी और प्रतिक्रिया भी दूंगी .पुन्श्य

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 9, 2014

बहुत बहुत धन्यवाद सुषमा जी ,पेड़ पौधे ,जीव,पक्षी , नदी पोखर और पूरे आसमान ज़मीं के हम ऋणी हैं,अपनी लेखनी से ही सही उनका दर्द सबको लिखकर बताते हैं ,पर्यावरण पर जेजे में सबने ही बहुत अच्छा लिखा है ,प्रतिक्रिया के लिए सादर आभार .

yamunapathak के द्वारा
June 9, 2014

निर्मल जी बेहतरीन कविता सच है वृक्ष जीवन भर हमें उपकृत करता है साभार

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 10, 2014

मंच पर आपकी कमी महसूस हो रही थी यमुनाजी ,.सार्थक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार .

Rupender Singh के द्वारा
June 12, 2014

Nice one….

Rupender Singh के द्वारा
June 12, 2014

I like it….

sanjay kumar garg के द्वारा
June 13, 2014

सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति के लिए बधाई! आदरणीया निर्मला जी!

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 13, 2014

सार्थक प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय संजयजी ,अनेक शुभ कामनाएं .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 13, 2014

Thanks for the nice comment Rupender singhji.

Jitendra Mathur के द्वारा
November 18, 2014

किसी भी सच्चे प्रकृति प्रेमी की आँखें सजल हो जाएं, ऐसी भावपूर्ण कविता लिखी है आपने ।

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
December 2, 2014

प्रकृति में सौन्दर्य है ,प्राण हैं और मनुष्य से अधिक परउपकार करने का ज़ज्वा भी है , मेरी भावनाएं आपने समझ कर प्रतिक्रिया दी ,हार्दिक आभार जितेन्द्र जी .


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