भोर की प्रतीक्षा में ...

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मेरा ही स्वाभिमान क्यों चोट खाता है ...निर्मला सिंह गौर

Posted On: 23 Jul, 2014 Others,कविता,Celebrity Writer में

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जब कोई किसी पर कहीं ज़ुल्म ढाता है,
मेरा ये अंतर मन क्यों टूट जाता है,
जब कोई फूलों को पैरों में बिछाता है,
मेरा ही स्वाभिमान क्यों चोट खाता है |
===========================.
माली चुन चुन कर फूल बेंच देता है,
कीमत मिल जाने पर खूब इतराता है,
दूसरी सुबह में चमन फिर फूल जाता है,
मेरा ही स्वाभिमान क्यों चोट खाता है |
.============================
जिसके उगते ही जो पुलकित हो जाती है,
पक्षी चहकते हैं कलियाँ खिल जातीं हैं,
वो रवि जब धरती पर आग बरसाता है,
मेरा ही स्वाभिमान क्यों चोट खाता है|
=============================.
जो दर्द सह कर वंश को चलाती है,
जो घर की खुशियों में जीवन लुटाती है,
उस कन्या जन्म पर घर आंसू बहाता है,
मेरा ही स्वाभिमान क्यों चोट खाता है |
=============================.
कुछ हंस के देते हैं कुछ हंस के लेते हैं,
कुछ लेने देने को इज्जत समझते हैं,
जब दहेज़ के लिए वर, वधू को जलाता है,
मेरा ही स्वाभिमान क्यों चोट खाता है |
==============================

जिसके स्वागत में वो अँखियाँ बिछाती है ,
खुद भी संवरती है घर भी सजाती है,
वो पति जब पत्नी को आँखें दिखाता है,
मेरा ही स्वाभिमान क्यों चोट खाता है |
.==============================
लाल को निहार कर बलिहारी जाती थी,
उसको सीने से लगा थकन उतर जाती थी ,
वो बेटा, माता को ब्रद्धाश्रम लाता है
मेरा ही स्वाभिमान क्यों चोट खाता है |
===============================
निर्मला सिंह गौर



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22 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
July 23, 2014

जो दर्द सह कर वंश को चलाती है, जो घर की खुशियों में जीवन लुटाती है, उस कन्या जन्म पर घर आंसू बहाता है, मेरा ही स्वाभिमान क्यों चोट खाता है | बहुत अच्छी कविता ! कन्या भ्रूण हत्या,दहेज़ से लेकर वृद्धों तक सबकी समस्याओं को आपने अपनी कविता में उजागर किया है ! बहुत बहुत बधाई !

pkdubey के द्वारा
July 23, 2014

प्रत्येक छंद में एक विकट प्रश्न,आदरणीया|सादर आभार |

deepak pande के द्वारा
July 23, 2014

ये आपकी  संवेदना है निर्मल जी जो आज भी सर्वे भवन्तु सुखिनः पर विश्वास करती हैं और किसी को कष्ट होने पर ह्रदय को दुखी कर देती हैं सुन्दर भावो को शब्दों में पिरोया है

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
July 23, 2014

क्योंकि आप निर्मला हो जैसे निर्मल जल ही खौलता है ,निर्मल चाॅद ही चमकता है ,निर्मल सोना ही दमकता है वैसे ही निर्मल मन भी ….ओम शांति शांति शांति

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 23, 2014

कविता पढ़ कर सार्थक प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक आभार आदरणीय सद गुरूजी ,दूर -पास की कुछ बातें मन को छू लेतीं हैं ,वही कविता की इमारत गढ़ देतीं हैं ,सादर.

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 23, 2014

कुछ एसी बातें घटतीं हैं समाज में जो मन को अंदर तक विचलित करतीं हैं,कविता सरल जरिया है अभिव्यक्ति का.प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार प्रवीण जी .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 23, 2014

कविता साधारण शब्दों में आपके समक्ष हैं दीपक भाई ,हम सब लेखक हैं ही संवेदनशील .आप ने बहुत अच्छी प्रतिक्रिया दी है सादर आभार आपका .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 23, 2014

आपने जो उत्कृष्ट प्रतिक्रिया दी है उसका बहुत बहुत अभिनंदन है आदरणीय हरिश्चंद्र जी ,मेरी साधारण भाषा में लिखी रचना के पीछे वही मन और भावनाएं हैं जो आपने समझी हैं –बस कविता सार्थक हो गयी ,आपका हार्दिक आभार .

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
July 24, 2014

माली चुन चुन कर फूल बेंच देता है, कीमत मिल जाने पर खूब इतराता है, दूसरी सुबह में चमन फिर फूल जाता है, मेरा ही स्वाभिमान क्यों चोट खाता है | निर्मला जी मनभावन अच्छी कविता । संवेदनाओं से परिपूर्ण ।

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 24, 2014

आदरनीय बिष्ट जी नमन आपने समय देकर सार्थक प्रतिक्रिया दी,आपका हार्दिक अभिनन्दन है ,सादर आभार आपका .

jlsingh के द्वारा
July 25, 2014

जिस निर्मल मन के अंदर स्वाभिमान धड़कता है विपरीत परिस्थितयों में आत्माभिमान फड़कता है. निर्मला जी संवेदनशील मन हमेशा अकुलाता है, छटपटाता है,,चोट खाता है, फिर भी फड़फड़ाता है. सादर!

Jyoti के द्वारा
July 25, 2014

निर्मला जी, भावों को बहुत ही सुन्दर तरीके से शब्दों में पिरोया है आपने . साभार .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 25, 2014

ब्लॉग पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है ज्योति जी ,आपकी प्रतिक्रिया पढ़ कर ख़ुशी हुई बहुत बहुत आभार .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 25, 2014

बहुत धन्यवाद आदरनीय जवाहर सिंह जी ,मै भी जो देखती हूँ वही लिखती हूँ और उस भोर की प्रतीक्षा में हूँ जब नया सूरज कोई अप्रिय खबर के साथ न उदय हो ,क्यों की हम आप सभी लेखक पर पीढ़ा को लेकर संवेदनशील हैं,और अपना दर्द लिख कर वयां करते हैं.,आपको बहुत बहुत शुभ कामनाएं ,सादर आभार

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 25, 2014

बहुत बहुत धन्यवाद सारस्वत जी ,आप जैसे सुधी लेखक बेस्ट ब्लोगर कह दें ,तो रचना स्वत ही सम्मानित हो गयी ,सार्थक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार .

Shobha के द्वारा
July 25, 2014

निर्मला जी आप बुद्धिजीवी हैं भावुक हैं इस लिए आपका मन चोट खाता है आपका स्वाभिमान कुछ कर गुजरने के लिए जाग जाता है आप जैसों ने ही न्याय अन्याय के फर्क को जताया है, स्वाभिमान को उठाया है डॉ शोभा भारद्वाज

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 26, 2014

इतनी अच्छी प्रतिक्रिया के लिए सादर आभार आदरणीय शोभा जी ,अन्याय देख कर सिर्फ अपनी अभिव्यक्ति ही कविता के रूप में लिख पाती हूँ आपने मेरे मन को सही आँका ,कई बार विवशता आड़े आती है,एक बार अपने लेडिज क्लब के साथ ब्रद्ध आश्रम गयी थी ,उनकी कहानियां सुन कर बहुत दुःख हुआ वहां से लौट कर कई दिन बिक्षुब्द रही,आप ने कविता पढ़ कर मेरा ह्रदय पढ़ लिया ,बहुत बहुत धन्यवाद आपका .सादर .

sadguruji के द्वारा
July 27, 2014

आदरणीया निर्मला सिंह गौर जी ! सुप्रभात ! मैं आपके ब्लॉग पर ये देखने आया था कि क्या आपकी रचनाएँ भी डिस्टर्व हुई हैं ! मुझे लग रहा था कि कहीं मेरे कम्प्यूटर या इंटरनेट ब्राउज़र में तो कोई गड़बड़ी नहीं है ! सबकी रचनाएँ डिस्टर्व हैं ! पद्य गद्य बन गया है और लेखों से पैराग्राफ गायब हो गए हैं ! सब खिचड़ी बन गया है ! जागरण परिवार इस तकनीकी खराबी की और ध्यान दे !

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 28, 2014

आदरणीय सद गुरु जी ,मेरी समस्या तो और विकट है ,कमेन्ट ही टाइप नहीं हो रहे ,बड़ी मुश्किल से माइक्रोसॉफ्ट में टाइप कर कर के भेज रही हूँ ,रचनाएँ तो ऊँची नीची हो ही गएँ हैं ,शायद कुछ तकनीकी समस्या है ,शुभ रात्रि .

ashishgonda के द्वारा
October 26, 2014

बहुत सारी सामाजिक कुरीतियों और बुराइयों का चित्रण है ये सब कुछ हमारे अपने ही घर में होता है और उसे करने कोई विदेशी नहीं आता, इन द्रौपदियों का चीर हम पाण्डव ही हरण करने रहे हैं, कोई कौरव नहीं है…..ज्वलंत प्रस्तुति काश ऐसे पति जो आँख दिखाते हैं ऐसे बच्चे जो भगवान से बढ़के पूजनीय माँ बाप को वृधाश्रम छोड़ आते हैं वो लोग इसे पढ़ पाते…………

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
October 27, 2014

आभार आशीष जी ,सार्थक प्रतिक्रिया के लिए ,ब्लॉग पर आपका अभिनन्दन है .


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