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जब मिलो .... निर्मला सिंह गौर

Posted On: 2 Aug, 2014 Others,Celebrity Writer,Hindi Sahitya में

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जब मिलो खुल कर मिलो,
हंस कर मिलो,
मिल कर हंसो,
दोस्ती के नाम पर,
ना हम कोई ताना कसें,
ना तुम कोई ताना कसो|
.
देना है उपहार तो फिर,
सिर्फ दो मुस्कान तुम,
और आँखों से जता दो,
प्रेम का अहसान तुम,
हमको मंहगी क़ीमती,
चीज़ों में दिलचस्पी नहीं,
सिर्फ तुम आते रहो,
मिलते रहो, भाते रहो,
हम जो भटकें राह तो तुम,
राह पर लाते रहो,
हम दिखाएँ चोट अपनी,
तुम वहां मरहम रखो,
ना हम कोई ताना कसें,
ना तुम कोई ताना कसो |
.
ज़िन्दगी के युद्ध में हम,
साथ मर लें, साथ जी लें,
तुम हमारे दर्द बांटो,
हम तुम्हारे अश्क पी लें,
भेद जो कोई हमारी मित्रता के मध्य डाले,
हार कर आदर्श हमको,
अपने जीवन का बनाले,
हम तुम्हारे मन बसें,
और तुम हमारे मन बसो,
हम सुनाएँ चुटकुले,
तुम खूब दे ताली हंसो,
ना हम कोई ताना कसें
ना तुम कोई ताना कसो ||
……………………………………
निर्मला सिंह गौर



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26 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
August 2, 2014

निर्मल जी आपकी यह कविता मुझे बहुत अच्छी लगी इसमें जीवन है पराजय से लड़ने की क्षमता है हम भी खुश रहें अपने आस पास सब को खुश रखें जितनी आप सुंदर है आप हसेंगी सारी दुनिया सुन्दर हो जाएगी डॉ शोभा

ranjanagupta के द्वारा
August 2, 2014

निर्मला जी !बहुत सुन्दर पंक्तियाँ ! काश ऐसा ही हो जाता !दुनिया नंदन कानन बन जाती! आपकी सदभावनाओ को बहुत बहुत सलाम !सादर !

ALKA GUPTA के द्वारा
August 2, 2014

सकारात्मक सोच के साथ जीवन का सुन्दर सन्देशवाहक रचना निर्मल जी बहुत अच्छा लगा पढ़कर

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 2, 2014

आपका हार्दिक आभार आदरणीय शोभाजी ,दरसल मनुष्य दूसरों में वही गुण देखता है जो उस में स्वयं विद्धमान होता है,आपकी तत्परित प्रतिक्रिया मेरे लिए अमूल्य है,आपका सानिध्य मेरी रचनाओं का सौभाग्य है ,बहुत बहुत धन्य वाद आपका ,शुभ रात्रि .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 2, 2014

रंजना जी आपने सच कहा , दुनिया कल्पनाओं में ही सुंदर है , हम दोस्ती के रिश्ते को इतना मज़बूत कर लें की दुनिया के दर्द भी दर्द ना लगें ,प्रतिक्रिया का हार्दिक आभार ,शुभ रात्रि .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 2, 2014

अल्काजी आपकी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार ,आपने सुंदर शब्द लिखे हैं बहुत बहुत अभिनन्दन आपका .

nishamittal के द्वारा
August 3, 2014

ऐसे दोस्त और ऐसी दोस्ती बस जीवन स्वर्ग बन जाय सुन्दर रचना

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 3, 2014

धन्यवाद आदरणीय निशाजी , मै जैसे दोस्त की कल्पना करती हूँ मैंने लिख दिया,प्रतिक्रिया के लिए आभार ,सादर .

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
August 4, 2014

निर्मला जी अभिवादन आपके भावों से शोले फिल्म का यह गीत बरबस मुंह से निकल गया …यह दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे ,छोड़ेंगे दम मगर तेरा साथ न छोड़ेंगे …ओम शांति शांति शांति

sadguruji के द्वारा
August 4, 2014

सिर्फ तुम आते रहो, मिलते रहो, भाते रहो, हम जो भटकें राह तो तुम, राह पर लाते रहो, हम दिखाएँ चोट अपनी, तुम वहां मरहम रखो, ना हम कोई ताना कसें, ना तुम कोई ताना कसो | आदरणीया निर्मला सिंह गौर जी ! दोस्ती दिवस पर बहुत सुन्दर और शिक्षाप्रद रचना ! दोस्त और दोस्ती कैसी होनी चाहिए,ये आपने अपनी कविता में बहुत कुशलतापूर्वक समझाया है ! मुझे महसूस हुआ कि ये कविता नहीं बल्कि आपके देह के भीतर की पवित्र जीवात्मा का स्वरुप है ! इस अनुपम रचना के द्वारा मंच की शोभा बढ़ाने के लिए और दोस्ती का सार्थक सन्देश देने के लिए आभार !

PKDUBEY के द्वारा
August 5, 2014

आज के मित्रो को एक सीख देती रचना आदरणीया.

mrssarojsingh के द्वारा
August 5, 2014

ख़ूबसूरत भावनाओं को खुद में समेटे हुए ,खुश्बू बिखेरती इस रचना के लिए मेरी ओर से ढेरों बधाई स्वीकार करें निर्मला जी …………

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 5, 2014

सच कहा आपने ,ये गीत दोस्ती की अच्छी मिसाल है ,प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार आदरणीय हरिशचंद्र जी .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 5, 2014

मुझे ख़ुशी होती है जब आप उसी धरातल पर खड़े होकर कविता पढ़ते हैं जिस पर खड़े होकर मैंने कविता लिखी होती है ,आपका हार्दिक आभार आदरणीय सद गुरूजी .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 5, 2014

आभार प्रवीण जी —मेरी कल्पना को आपने सम्मान दिया ,आपका ब्लॉग पर अभिनन्दन है .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 5, 2014

कविता को अपने सुंदर शव्दों से सराहने का बहुत बहुत शुक्रिया सरोज जी ,प्रतिक्रिया के लिए आभार .

bhagwandassmendiratta के द्वारा
August 6, 2014

अति सुन्दर कविता है, आप के नाम की तरह स्वच्छ व स्वच्छंद, अपनों में निस्वार्थ भाव जागृत करती हुई कविता| बहुत बहुत साधुवाद|

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 6, 2014

आपका ब्लॉग पर अभिनन्दन है आदरणीय भागवान दास जी , आपने इतनी सुंदर प्रतिक्रिया दे कर मेरा उत्साहवर्धन किया ,आपका हार्दिक आभार .

jlsingh के द्वारा
August 10, 2014

देना है उपहार तो फिर, सिर्फ दो मुस्कान तुम, और आँखों से जता दो, प्रेम का अहसान तुम, हमको मंहगी क़ीमती, चीज़ों में दिलचस्पी नहीं, अति सुन्दर निर्मला जी, बहु बहुत बधाई और अभिनंदन!

deepakbijnory के द्वारा
August 10, 2014

यदि ऐसी सोच सबकी हो जाय तो दुनिया में वसुधैव कुटुंबकम की सार्थकता ही सिद्ध हो जाय खूबसूरत सकारात्मक vicharon se bhari kavita

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
August 12, 2014

ज़िन्दगी के युद्ध में हम, साथ मर लें, साथ जी लें, तुम हमारे दर्द बांटो, हम तुम्हारे अश्क पी लें, बहुत सुन्दर भाव काश मानव ऐसी भावनाओं को तरजीह दे तो आनंद और आये भ्रमर ५

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 14, 2014

सच कहा सुरेन्द्र जी ,ज़िन्दगी का सफर आसानी से कट जाता है अगर हम आपसी सदभाव ,स्नेह और संवेदना जैसे नैतिक मूल्य न भूलें.प्रतिक्रिया के लिए सादर आभार .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 14, 2014

बहुत बहुत धन्यवाद दीपक भाई ,हम आप अपनी लेखनी से वसुधैव कुटुमबकम के अरदास लगा सकते है ,उससे ज्यादा कुछ नहीं .सादर आभार .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 14, 2014

आपसी स्नेह से कीमती कोई बस्तु नहीं होती ,ये बात सभी जानते है ,आपकी प्रतिक्रिया भी उतनी ही कीमती होती है आदरणीय जवाहर सिहं जी ,सादर आभार .

September 13, 2014

ज़िन्दगी के युद्ध में हम, साथ मर लें, साथ जी लें, तुम हमारे दर्द बांटो, हम तुम्हारे अश्क पी लें, वाह बहुत ही भावपूर्ण और सुंदर अभिव्यक्ति आपकी रचनाओ को पढ़ना स्वयं में एक सुखद एहसास देता है ..बधाई आदरणीय निर्मला जी..काफी कुछ सीखने को मिलता है आपसे..सादर..

Jitendra Mathur के द्वारा
November 21, 2014

अत्यंत सुंदर एवं भावपूर्ण कविता है यह आपकी । मित्र हो तो बस ऐसा ही हो । और हम मित्र बनें किसी के तो बस ऐसे ही बनें । पर ऐसे सच्चे मित्र इस स्वार्थी संसार में बड़े दुर्लभ हैं निर्मला जी । आप की एक अन्य कविता की पंक्ति है – ‘इस ज़माने में बड़ी मुश्किल से मिलते हैं यहाँ’ । आप ही ने कहा है – ‘दोस्त वो है बिन कहे जो दर्द को पहचान ले, हाल-ए-दिल क्या है, ये बस चेहरे से पढ़कर जान ले’ । समझाने वालों से दुनिया भरी पड़ी है लेकिन ऐसा मित्र जो आपको समझाने का नहीं बल्कि समझने का प्रयास करे, सिर्फ़ किस्मत से मिलता है:अत्यंत सुंदर एवं भावपूर्ण कविता है यह आपकी । मित्र हो तो बस ऐसा ही हो । और हम मित्र बनें किसी के तो बस ऐसे ही बनें । पर ऐसे सच्चे मित्र इस स्वार्थी संसार में बड़े दुर्लभ हैं निर्मला जी !


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