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श्रद्धांजलि ---निर्मला सिंह गौर

Posted On: 13 Aug, 2014 Others में

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शहीदों के अमर वलिदान को श्रद्धांजली दे दें
जिन्होंने जान दी है उन फरिश्तों को दुआ दे दें |
.
बड़े बेफ़िक्र हो कर जी रहे हम, मुल्क में अपने
नहीं देखें हैं आज़ादी के रण मे टूटते सपने,
नहीं देखी है हमने खून की बहती हुई गंगा
की मारा किस तरह रावण, जलाई किस तरह लंका ,
हुए हैं ज़ख्म जिनके उनको, थोड़ी सी दवा दे दें
जिन्होंने जान दी है उन फ़रिश्तों को दुआ दे दें |
.
हिमालय की बुलंदी कर रही थी ध्यान आकर्षित
कि देखो कारगिल की सरजमीं में बस रही दीमक’
उठाये शस्त्र, कूदे रण में भारत माता के प्यारे
कि दिन के वक्त सारे दुश्मनों को दिख गये तारे ,
चलो हम सर झुका कर शुक्रिया उनका अदा कर दें
जिन्होंने जान दी है , उन फ़रिश्तों को दुआ दे दें |
..
वो जिनके लाल खोये हैं, उन्हें थोड़ा सहारा दें ,
पिता जिनके हैं बिछुड़े, उनको भी जाकर के बहला लें,
हमे दे शक्ति ईश्वर, हम शहीदों के दुलारों की
भंवर में आ गयी किश्ती, उसे कोई किनारा दें,
तिरंगे से कहो, श्रद्धांजली के पुष्प बरसा दे ,
जिन्होंने जान दी है , उन फरिश्तों को दुआ दे दें ||
………………………………………………………निर्मला सिंह गौर



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24 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
August 13, 2014

निर्मला जी देश भक्ति से ओत प्रोत बहूत खूब सूरत कविता डॉ शोभा

jlsingh के द्वारा
August 14, 2014

शहीदों को श्रद्धांजलि! देशभक्ति की सुन्दर रचना आदरणीया निर्मला जी!

pkdubey के द्वारा
August 14, 2014

दिव्य काव्य,बहुत अच्छा सन्देश और आज के युवाओं को जागृत करती रचना आदरणीया | अवश्य ही यह सबसे दुर्धर्ष कार्य है,जिसे भारत माता के सपूत हँसते -हँसते पूरा करते हैं | सादर साष्टांग नमन उन वीरों को|

sadguruji के द्वारा
August 14, 2014

वो जिनके लाल खोये हैं, उन्हें थोड़ा सहारा दें , पिता जिनके हैं बिछुड़े, उनको भी जाकर के बहला लें ! बहुत सुन्दर वॉर शिक्षाप्रद सन्देश ! बहुत बहुत बधाई !

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
August 14, 2014

तिरंगे से कहो, श्रद्धांजली के पुष्प बरसा दे , जिन्होंने जान दी है , उन फरिश्तों को दुआ दे दें ||………वाह, बेहद खूबसूरत कविता , निर्मला जी ।

deepak pande के द्वारा
August 14, 2014

वो जिनके लाल खोये हैं, उन्हें थोड़ा सहारा दें , पिता जिनके हैं बिछुड़े, उनको भी जाकर के बहला लें, हमे दे शक्ति ईश्वर, हम शहीदों के दुलारों की भंवर में आ गयी किश्ती, उसे कोई किनारा दें, bahut khoob nirmala jee man deshbhakti kee bhawna se ot prot ho gaya ye padkar

ranjanagupta के द्वारा
August 14, 2014

निर्मला जी !बहुत सुन्दर शहीदों को शब्द श्रद्धांजलि अर्पित की है आपने ! देश के प्रति कर्तव्य निभाने के लिए हमे जो भी सीखना है वह अतीत से ही सीखना होगा ! सादर ,साभार !!

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 14, 2014

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय रंजना जी,ईश्वर के बाद मेरे ह्रदय में शहीदों के लिए सम्मान है.बस अपनी भावनाएं ही समर्पित कर सकती हूँ ,आपका हार्दिक आभार .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 14, 2014

देश के प्रति प्रेम आपकी रचनाओं में झलकता भी है दीपक भाई ,प्रतिक्रिया के लिए सादर आभार .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 14, 2014

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय बिष्ट जी ,आपने समय दिया ,आपकी प्रतिक्रिया का अभिनन्दन है ,सादर आभार .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 14, 2014

आप से बहुत कुछ सीख रही हूँ आदरणीय सद्गुरु जी,विनम्रता आपका दिव्य आभूषण है ,कविता की सराहना के लिए हार्दिक आभार .जय हिन्द .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 14, 2014

धन्यवाद प्रवीण जी , सैनिकों के त्याग की उंचाई के समक्ष मेरी कविता ,मेरी भावनाओं का कद बहुत छोटा है ,पर फिर भी मेरे शब्द वीर सैनिको और अम्रर शहीदों को समर्पित हैं .जय हिन्द.

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 14, 2014

धन्यवाद आदरणीय जवाहर सिंह जी ,सराहना का हार्दिक अभिनन्दन है ,जयहिंद.

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 14, 2014

मेरी कवितायेँ आप जैसे सुधी लेखक पढ करके सराह देते हैं यही बात बहुत बल देती है आदरणीय शोभाजी .आपका सादर आभार ,जय हिन्द .

Bhagwan Dass Mendiratta के द्वारा
August 15, 2014

जितने सुन्दर शब्द उससे भी अधिक सुन्दर प्रस्तुति, स्वतंत्रता के इस शुभ अवसर पर इससे मूल्यवान श्रद्धांजलि कोई हो सकती है क्या? स्नेह ,सम्मान , दुआ जो भी दिया जा सकता था सभी कुछ इस कविता द्वारा देश के प्रहरियों को दिया गया है | आपको बहुत बहुत नमन| भगवान दास , गुड़गांव |

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 15, 2014

आपके शब्द बहुत प्रेरणा दायक हैं ,आदरणीय भगवान् दास जी ,इतनी सुंदर प्रतिक्रिया पाकर मेरी कविता ,मेरे विचार ,मेरी भावनाएं और देश के सैनिकों के प्रति मेरी संवेदनाओं को आपका आशीर्वाद मिला,आपका ब्लॉग पर हार्दिक अभिनन्दन है बहुत बहुत आभार . सादर

Ravinder kumar के द्वारा
August 15, 2014

निर्मला जी, स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं. देश के लिए जीने और मरने वाले सैनिकों को समर्पित रचना के लिए आपको बधाई. तिरंगे से कहो, श्रद्धांजली के पुष्प बरसा दे , जिन्होंने जान दी है , उन फरिश्तों को दुआ दे दें || भावपूर्ण अभिव्यक्ति. शुभकामनाएं, जय हिन्द .

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
August 16, 2014

निर्मल जी ….श्रद्धांजली… ने लता मंगेशकर के गीत की तरह ही ऑंखें नम कर दी ….ए मेरे बतन के लोगो जरा आॅख मैं भर लो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्वानी ….काश आपका गीत भी अमर हो जाता ओम शांति शांति 

Ashutosh Shukla के द्वारा
August 16, 2014

बहुत सुन्दर रचना ‘यमुना मैंम’ बधाई

yamunapathak के द्वारा
August 17, 2014

बेहद भावपूर्ण कविता है निर्मला जी साभार

sanjay kumar garg के द्वारा
August 20, 2014

सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए बधाई ! आदरणीया निर्मला जी!

sadguruji के द्वारा
September 16, 2014

आदरणीया निर्मला सिंह गौर जी ! सादर अभिनन्दन ! लगभग एक माह से मंच पर आप अनुपस्थित हैं ! ईश्वर से प्रार्थना है कि सब कुशल मंगल हो ! उम्मीद है कि आप अपनी एक नई रचना के साथ इस मंच पर वैचारिक रूप से अतिशीघ्र उपस्थित होंगी ! अपने आशीर्वाद और शुभकामनाओं सहित-सद्गुरुजी !

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
November 7, 2014

मेरे ह्रदय में शहीदों के लिए जो संवेदना है आपने उस को महसूस किया ,बहुत आभार सारस्वत जी ,प्रतिक्रिया के लिए ,खास कर ३-४ माह पहले की पोस्ट पढ़ कर,सादर .


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