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भावना के स्वच्छ निर्झर ---निर्मला सिंह गौर

Posted On: 11 Aug, 2015 Others में

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ये भला बंजर धरा पर
पुष्प कैसे खिल गए हैं
भावना के स्वच्छ निर्झर
अनकहे ही बह चले हैं |
.
फिर किसी ने अक्षरों की
रूह को बहका दिया है
फिर किसी ने शब्द के
आकाश को महका दिया है
फिर हमारी कल्पना के
सुप्त स्वर जाग्रत हुए हैं
भावना के स्वच्छ निर्झर
अनकहे ही बह चले हैं |
.
फिर हमारी लेखनी
अभिव्यक्ति को आतुर हुई है
जैसे मरुथल के ह्रदय से
सृजन की सरिता बही है
फिर हमारी चेतना के
पंछियों के पर खुले हैं
भावना के स्वच्छ निर्झर
अनकहे ही बह चले हैं |
.
फिर हमारी निडरता ने
विजय पाई मुश्किलों पर
फिर अतिथि बन कर कई
तूफान ठहरे साहिलों पर
फिर हमारी नाव ने
मझधार से रिश्ते किये हैं
भावना के स्वच्छ निर्झर
अनकहे ही बह चले हैं |
……………………………निर्मल



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24 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
August 12, 2015

फिर हमारी लेखनी अभिव्यक्ति को आतुर हुई है जैसे मरुथल के ह्रदय से सृजन की सरिता बही है फिर हमारी चेतना के पंछियों के पर खुले हैं भावना के स्वच्छ निर्झर अनकहे ही बह चले हैं | बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति आदरणीया निर्मला जी!

sadguruji के द्वारा
August 12, 2015

फिर हमारी लेखनी अभिव्यक्ति को आतुर हुई है जैसे मरुथल के ह्रदय से सृजन की सरिता बही है ! आदरणीया निर्मला सिंह गौर “निर्मल” जी बहुत सुन्दर और भावपूर्ण कविता ! ह्रदय को झंकृत करते हुए भाव विभोर कर गई ! इस मंच पर आपका आना ही किसी मरुस्थल में सरिता बहने के जैसा है ! इस मंच पर ये सरिता यूँ ही बहती रहे, बस यही शुभकामना और शुभेक्षा है ! अति उत्तम प्रस्तुति हेतु सादर आभार !

advpuneet के द्वारा
August 12, 2015

बहुत सुन्दर कविता है..!

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 13, 2015

हार्दिक आभार आदरणीय जवाहर सिंह जी ,सादर

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 13, 2015

आपके आशीर्वाद की बहुत ज़रूरत है आदरणीय सद्गुरुजी ,कविता पर सुंदर प्रतिक्रिया के लिए आपका आभार ,सादर .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 13, 2015

ब्लॉग पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है पुनीत जी ,प्रतिक्रिया के लिए आभार .

जितेन्द्र माथुर के द्वारा
August 13, 2015

आपकी यह कविता मैंने पहले भी पढ़ी थी । इस मंच पर इसे साझा करके आपने मेरी तत्संबंधी स्मृतियों को नूतन कर दिया । जैसे निर्मल इस कविता के शब्द हैं, वैसे ही इसमें अंतर्निहित भाव हैं और वैसा ही इसका प्रभाव पड़ता है पढ़ने वालों पर ।

Jitendra Mathur के द्वारा
August 13, 2015

आपकी यह कविता मैंने पहले भी पढ़ी थी । इस मंच पर इसे साझा करके आपने मेरी तत्संबंधी स्मृतियों को नूतन कर दिया । जैसे निर्मल इस कविता के शब्द हैं, वैसे ही इसमें अंतर्निहित भाव हैं और वैसा ही इसका प्रभाव पड़ता है इसे पढ़ने वालों पर । हार्दिक अभिनंदन ।

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 13, 2015

ब्लॉग पर आपका अभिनन्दन है जितेन्द्र जी ,आपकी स्मरण शक्ति गज़व की है ,ये कविता मेरी पुस्तक ‘तम्हें देखकर’में २००३ में प्रकाशित हो चुकी है,आपने याद रखा तो कविता उम्र दराज हो गई .हार्दिक आभार .

Shobha के द्वारा
August 14, 2015

प्रिय निर्मला जी आपकी कविताएँ मुझे सदैव प्रिय रहीं हैं मैने जैसे ही पढ़ी बहुत पसंद आई मेरी पहली प्रतिक्रिया थी आप तक पहुंची नही

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 14, 2015

आप मेरी रचना तहे दिल से पसंद करतीं हैं इसका मुझे पूरा आभास है आदरणीय शोभाजी ,मै आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार करती हूँ आपका हार्दिक आभार ,सादर.

sadguruji के द्वारा
August 14, 2015

आदरणीया निर्मला सिंह गौर जी ! सुप्रभात ! नई सुबह सबके लिए मंगलमय हो ! ‘बेस्ट ब्लॉगर आफ दी वीक’ चुने जाने पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिये ! ये रचना पूर्णतः इस सम्मान की हकदार थी ! इस सम्मानित मच के संपादक मंडल को धन्यवाद ! जागरण मंच के संपादक मंडल से एक अनुरोध है कि मंच के मुख्य पृष्ठ पर पोस्ट डिस्प्ले बोर्ड में लगभग २४ घंटे ‘काला जादू’ और ‘वशीकरण’ की फर्जी पोस्ट दिखाई देती हैं ! यदि ये फर्जी पोस्ट हैं तो इनका रजिस्ट्रेशन रद्द कीजिये ! यदि ये रुपए लेकर प्रकाशित होने विज्ञापन हैं तो दुनिया के सबसे अमीर और सम्मानित अखबार ‘दैनिक जागरण’ के इस मंच के बारे में क्या कहूँ ! बहुत दुःख के साथ बस इतना ही- रूपये कमाने की खातिर अपने आदर्श, नैतिकता और जमीर सब बेच दिए ! इस विषय पर अब तो कुछ सकारात्मक और मंच के हित में चिंतन कीजिये ! सादर धन्यवाद !

nishamittal के द्वारा
August 14, 2015

अति सुंदर रचना पर बधाई आपको ,शुभकामनाएं

Bhola nath Pal के द्वारा
August 14, 2015

आदरणीयागौर जी ! सुन्दर भाव व् शब्द चयन को प्रणाम …….

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 15, 2015

आपका हार्दिक अभिनन्दन है आदरणीय भोला नाथ जी ,प्रतिक्रिया के लिए आभार ,सादर.

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 15, 2015

बधाई के धन्यवाद आदरणीय सद्गुरुजी ,मंच पर सेंसर होकर ही आर्टिकल पब्लिश होना चाहिए ,मै भी आपकी बात से सहमत हूँ .सादर.

एल.एस.बिष्ट् के द्वारा
August 17, 2015

निर्मला जी अभिवादन । बधाई साप्ताहिक सम्मान के लिए व बहुत सुंदर कविता की रचना के लिए ।

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 18, 2015

आपका हार्दिक अभिनन्दन आदरणीय बिष्ट जी ,रचना पढ़ कर सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए आभार ,सादर .

yamunapathak के द्वारा
August 19, 2015

आदरणीय निर्मल जी नमस्कार बार बार प्रतिक्रिया देती हूँ सबमिट नहीं हो पाती आपको अतिशय बधाई सभर

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 21, 2015

आपका हार्दिक अभिनन्दन है आदरणीय यमुना जी ,प्रतिक्रिया का आभार, सादर .

Connie के द्वारा
October 17, 2016

You write so hosently about this. Thanks for sharing!


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