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दोस्ती---निर्मला सिंह गौर

Posted On: 9 Oct, 2015 Others में

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कुछ क़दम जो रास्तों में साथ में आते रहे
और अपनी दस्ताने हमको बतलाते रहे
वो हमारे दर्द को समझेंगे क्या जानेंगे क्या
जो हमें जब भी मिले ,खुद को ही समझाने लगे |
.
कुछ मिले चलते हुए कुछ राजसी अंदाज़ में
एक रुतवा सा बिखरता था खुली आवाज़ में
आओ बैठो और देखो तो हमारे ठाठ वाठ
खास नग्मे ही निकलते हैं हमारे साज़ में |
.
वो हमारी हैसियत की हद को समझाने लगे
हम दिमागी हाल पर उनके तरस खाने लगे
चार लोगो ने जहाँ देखा हमें संग घूमते
वो उन्हीं को ही हमारे दोस्त बतलाने लगे |
.
दोस्त क्या होता है क्या होतीं हैं उसकी खूबियाँ
इस ज़माने में बड़ी किस्मत से मिलता हैं यहाँ
जो समुन्दर की तरह पीता हैं सारे राज़-ए-दिल
हो ख़ुशी या गम ,ज़रूर मौज़ूद होता हैं वहां |
.
दोस्त होता है जहाँ पर बांध दो दुखों की नाव
दोस्त देता है कड़कती धूप में ठंडी सी छाँव
दोस्त बनता है सहारा और दिखलाता है राह
जब मुसीबत में कहीं रखते कहीं पड़ते हैं पांव |
.
दोस्त है जो अनकहे ही दर्द को पहचान ले
हाल -ए -दिल क्या है ये बस चहरे से पढ़ कर जान ले
आँख से आंसू जो टपके तो बड़े ज़ज्वात से
उसको मोती की तरह हांथों पे अपने थाम ले |
.
दोस्ती जमकर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
लेने से ज़्यादा उसे देने की ही चाहत रहे
फ़ायदा- नुक्सान की बातें न आयें बीच में
एक -दूजे से सदा मिलने की फरमाइश रहे ||
……………………………………………….निर्मल
.

.

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19 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepak pande के द्वारा
October 9, 2015

दोस्त है जो अनकहे ही दर्द को पहचान ले हाल -ए -दिल क्या है ये बस चहरे से पढ़ कर जान ले आँख से आंसू जो टपके तो बड़े ज़ज्वात से उसको मोती की तरह हांथों पे अपने थाम ले waah aadarniya  nirmla  didi padkar apne बचपन के दोस्त याद आ गए

shakuntla mishra के द्वारा
October 10, 2015

बहुत सुन्दर ! श्रेठ है परिभाषा दोस्ती की पर आज जिसे ऐसा दोस्त मिले वो किस्मत का धनी है 1

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
October 10, 2015

हार्दिक आभार आदरणीय दीपक जी ,अगर रचना दर्पण बन जाये की उसमे सब अपना अक्ष देख लें तो लेखक की भावना धन्य हो जाती है ,आपकी प्रतिक्रिया पढ़ कर एसा ही महसूस हुआ |सादर अभिनन्दन .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
October 10, 2015

आदरणीय शकुंतला जी आपका हार्दिक अभिनन्दन है रचना पर सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार ,सादर .

Jitendra Mathur के द्वारा
October 12, 2015

बरसों पहले ‘अणुशक्ति’ पत्रिका में पहली बार पढ़ी थी आपकी यह कविता । इतना प्रभावित किया इसने मुझे कि इसकी कई पंक्तियाँ तो मुझे कंठस्थ हो गई हैं और मैं गाहे-बगाहे उन्हें उद्धृत भी करता हूँ । सच ही तो है - दोस्त है जो अनकहे ही दर्द को पहचान ले, हाल-ए-दिल क्या है ये बस चेहरे से पढ़ कर जान ले । दोस्त आपको समझते हैं, समझाते नहीं । इसीलिए वे दुर्लभ होते हैं । समझाने वालों की क्या कमी है दुनिया में ? एक ढूंढिए, हज़ार मिलते हैं । वो हमारे दर्द को समझेंगे क्या, जानेंगे क्या जो हमें जब भी मिलें, हम को ही समझाने लगें । सच्ची दोस्ती क्या है, अगर कोई जानना चाहे तो बस आपकी इस कविता को पढ़ ले, गुन ले, मन में उतार ले । आपकी यह कविता मात्र प्रशंसनीय नहीं है, अनमोल है यह ।

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
October 12, 2015

बहुत अच्छा लगा आपकी प्रतिक्रिया पढ़ कर ,जितेन्द्र जी आपको कविता याद थी तो इसके भाव कहीं न कहीं आपके अपने मन की भावना से मिलते होंगे ,आपका हार्दिक आभार.|

pkdubey के द्वारा
October 14, 2015

वरिष्ठ रचनाकार के साहित्य पर प्रतिक्रिया देना,ऐसा लगता जैसे,” नानी के आगे ,ननिहाल की बातें” | आदरणीया ,आप सिद्धांत लिखती हैं,जीवन के सूत्र लिखती हैं | सरल शब्दों और लोकबोली में आप जीवन की गहराई को लिखती हैं ,सादर आभार, नमन |

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
October 14, 2015

हार्दिक आभार आपका प्रवीण जी ,आपके शब्द पढ़ कर मन प्रसन्न हो गया ,मेरे अपने अंतर की भावना को माँ सरस्वती की कृपा से शब्द मिल जाते हैं ,जो जोड़ तोड़ के नहीं बल्कि सरल होते हैं,और मुझे आप सब के स्नेह,सराहना एवं सम्मान के पुष्प मिल जाते हैं जो की मै माँ सरस्वती को अर्पण कर देती हूँ , आपका हार्दिक अभिनन्दन है .

Shobha के द्वारा
October 14, 2015

प्रिय निर्मला जी आज के समय में अच्छे दोस्त अपने रिश्तों से अधिक काम आते हैं मेरे एक जानकार हैं वह विदेश पढ़ने के लिए जा रहे थे उन्होंने बैंक से लोंन लिया वह इतना नहीं था उनका गुजारा हो सके उसके दोस्तों ने बिना मांगे पैसा दिया जबकि अपनी पत्नी के पास पैसा था उसने इससे पहले वःह कुछ कहें कहा मुझसे आशा मत रखना लेने से ज़्यादा उसे देने की ही चाहत रहे फ़ायदा- नुक्सान की बातें न आयें बीच में एक -दूजे से सदा मिलने की फरमाइश रहे ||आपकी इन पंक्तियों से मुझे इस दोस्ती की बात याद आई आप सदैव भाव पूर्ण लिखती हैं बहुत अच्छा लिखती हैं ………………………………………………

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
October 15, 2015

आपने जो उदाहरन दिया है वो इस कविता की कल्पना का आधार है आदरणीय शोभाजी ,दोस्ती इसी तरह की ही होना चाहिए,जो वक्त पर काम आये,निस्वार्थ भावना से दोस्ती ही नहीं हर रिश्ता फलता फूलता है,आपकी प्रतिक्रिया अमूल्य होती है ,हार्दिक आभार ,सादर .

drashok के द्वारा
October 15, 2015

श्री मति निर्मला जी दोस्ती पर बहुत अच्छी कविता परन्तु एक कविता यह भी हैं “वह मेरा दोस्त है सारे जहां को हैं मालूम दगा करे किसी से तो शर्म आये मुझे “लेकिन एक भले मन की नजर में दोस्ती बहुत बड़ी चीज हैं

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
October 15, 2015

हार्दिक अभिनन्दन आदरणीय डॉ. अशोक जी आपका , दोस्ती पर आपकी दो पंक्तिया बहुत अच्छी लगीं ,आपने अपनी व्यस्त दिनचर्या से वक्त निकल कर बहुत अच्छी प्रतिक्रिया दी , सादर आभार .

sadguruji के द्वारा
October 17, 2015

वो हमारे दर्द को समझेंगे क्या जानेंगे क्या जो हमें जब भी मिले ,खुद को ही समझाने लगे ! बहुत खूब ! दोस्ती के संवेदनशील भावों में बहुत गहराई से डूबकर आपने लिखा है ! हृदयस्पर्शी रचना के लिए बधाई !

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
October 20, 2015

सादर आभार आपका आदरणीय सद्गुरुजी ,आपकी प्रतिक्रिया पढ़ कर उत्साहवर्धन होता है ,सादर .

Lettice के द्वारा
October 17, 2016

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