भोर की प्रतीक्षा में ...

कविताएँ एवं लेख

52 Posts

903 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 16670 postid : 1178427

सफ़र----निर्मला सिंह गौर

Posted On: 17 May, 2016 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

मरुस्थल पर मेघ दल भी गर्जना कर चल दिए
प्यास ने अधरों से कुछ सम्बन्ध ऐसे कर लिये।
नीर के सैलाब को चुपचाप आँखे पी गईं
दर्द ने चेहरे से कुछ अनुबंध ऐसे कर लिए।।
.
ठोकरों ने कुछ हमारी चाल को रफ़्तार दी
पत्थरों से भी हमारे खून के रिश्ते बने
चल पड़े हम बेधड़क से ऊँची नीची राह पर
रास्तों ने पैरों को कुछ ऐसे आमन्त्रण दिए।।
.
था सफ़र का शौक़ तो हम उम्र भर करते रहे
मोम के थे पाँव फिर भी आग पर चलते रहे
परिजनों के घर हमें उम्मीद से ज़्यादा मिला
चोट दी आतिथ्य में और भेंट में मरहम दिए।।
.
हम सयानो मे सदा नादान कहलाते रहे
और हंस कर व्यंग बाणों की सज़ा पाते रहे
यह नहीं कि दर्द ने हमको सताया ही नहीं
बस हमारे भाग्य में थे हमने हंस कर सह लिए।।
.
निर्मल…

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

7 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
May 18, 2016

प्रिय निर्मला जी आपको बहुत समय बाद ब्लॉग पर देखा आपकी रचना पढ़ने का अवसर आपने दिया सदैव की भाँती सुंदर रचना नीर के सैलाब को चुपचाप आँखे पी गईं दर्द ने चेहरे से कुछ अनुबंध ऐसे कर लिए।। अति सुंदर

Jitendra Mathur के द्वारा
May 18, 2016

आपके अशआरात में अपने दर्द का अक्स देख रहा हूँ । ऐसा लगता है जैसे आपने दर्द की सियाही में कलम डुबोकर यह नज़्म लिखी है । बस महसूस कर रहा हूँ उसे जो इसके एक-एक हर्फ़ में छुपा है । जज़्बाती लोगों के दर्द अकसर एक जैसे जो होते हैं ।

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
May 18, 2016

आपका हार्दिक आभार,जितेंद्र जी।

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
May 18, 2016

प्रणाम शोभाजी ,आपका सादर आभार ।

sadguruji के द्वारा
May 26, 2016

था सफ़र का शौक़ तो हम उम्र भर करते रहे ! मोम के थे पाँव फिर भी आग पर चलते रहे !! बहुत खूब ! आदरणीया निर्मला सिंह गौर जी, बहुत बहुत अभिनन्दन और बधाई ! काफी समय बाद आपकी ये अतिसुन्दर और साहित्यिक भाषा में बेहद वजन वाली रचना पढ़ने को मिली है ! अच्छी प्रस्तुति हेतु हार्दिक आभार !

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
May 27, 2016

आज कल प्रवास पर हूँ,आदरणीय सद्गुरु जी,आप सब की याद आती है ,रचनाएँ भी नही पढ़ पाती,प्रतिक्रिया का हार्दिक आभार। सादर

Caroline के द्वारा
October 17, 2016

A rolling stone is worth two in the bush, thanks to this artilce.


topic of the week



latest from jagran