भोर की प्रतीक्षा में ...

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सावन---निर्मला सिंह गौर

Posted On: 19 Jul, 2016 में

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देखो सावन का शुभागमन
उर्वर वसुधा पुलकित अम्बर
शीतल शीतल सुंदर शशिकर
अन्तर में जलता है रविकर|
निर्मल निर्मल जल का सागर
श्यामल श्यामल संध्या अम्बर
श्वेतल श्वेतल है ज्योतिस्ना
उज्वल उज्वल निशि का आंचल |
सावन की पहली है फुहार
मिटटी से उठती है सुगंध
फूलों पर मोती बैठ गये
पेड़ों ने पहना चटख रंग
पक्षी चहके उपवन महके
सरिताओं का परिवार बढ़ा
सावन लेकर आया क्या क्या
मन से मन का संचार बढ़ा |
पायल झनके कंगन खनके
आँचल लहराये अम्बर में
गोरी झूले ऐसे झूला
लहरें उठ जाएँ सागर में
सागर छू कर आती वयार
सिंदूरी बेला सूर्य अस्त
पुलकित पक्षी कर रहे नृत्य
ये वसुंधरा बन गयी स्वर्ग |
……………………………………
निर्मला सिंह गौर

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13 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
July 20, 2016

भाव-विभोर हो गया हूँ इस कविता को पढ़कर । आज ही श्रावण का शुभारंभ हुआ है और आज ही आपकी इस अनमोल कविता ने मानस को आप्यायित कर दिया । आभार के अतिरिक्त क्या प्रतिक्रिया दूं ।

Shobha के द्वारा
July 20, 2016

बहुत प्रतीक्षा के बाद आपकी सावन पर लिखी भावनाएं पढ़ने को मिली अति सुंदर निर्मला जी में आपको अक्सर मिस करती थी मेरा इंटरनेट खराब चल रहा है इसलिए आपकी कविता आज पढ़ने को मिली अति सुंदर bhav

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 21, 2016

हार्दिक अभिनन्दन आपका जितेन्द्र जी ,सावन के अहसास को आपने पढ़ा और महसूस कर लिया तो हो गया लिखना सफल ,बहुत बहुत आभार .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 21, 2016

नमस्कार आदरणीय शोभा जी ,इस बीच ८ महीने मै भी प्रवास पर थी और इन्टरनेट मिडिया से बिमुख रही पर आपकी याद हमेशा आती थी, आपके कुछ शब्द मेरे लिए संजीवनी से कम नही हैं,आपका हार्दिक आभार ,सादर .

jlsingh के द्वारा
July 22, 2016

पुलकित पक्षी कर रहे नृत्य ये वसुंधरा बन गयी स्वर्ग | जागरण मंच भी तृप्त हुआ, होती ऐसी सावन फुहार, पक्षी मन के कूके मन में, बह चली सरित ले जल की धार… आदरणीया निर्मला जी, आपकी अनुपस्थिति हम सबको खलती है, बीच बीच में दर्शन दे दिया करें! सादर!

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 22, 2016

आपका हार्दिक अभिनन्दन आदरणीय सिंह साहब ,इस बीच मुझे भी आप सब की कमी बहुत महसूस हुई कोशिस करूंगी मंच पर सक्रिय होकर पठन पाठन करूं ,रचना पर इतनी सुंदर प्रति क्रिया के लिए आभार ,सादर

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 22, 2016

बहुत बहुत धन्य वाद आदरणीय मदन मोहन जी ,आपके ब्लॉग अवश्य पढ़ कर अपनी राय प्रस्तुत करूंगी ,रचना पर सार्थक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार ,सादर

Alka के द्वारा
July 25, 2016

आदरणीय निर्मला जी , बहुत सुन्दर सजीव अभिव्यक्ति | सावन तो सभी को आह्लादित करता है | वसुंधरा बन गई स्वर्ग….

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 26, 2016

आपका अभिनन्दन है अलका जी ,सार्थक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार .सादर .

sadguruji के द्वारा
July 28, 2016

आदरणीया निर्मला सिंह गौर जी ! सादर अभिनन्दन ! बहुत दिनों बाद आपने मंच पर प्रस्तुति दी ! बहुत सुन्दर रचना और सावन का ऐसा सुन्दर वर्णन कि कहना ही पडेगा- वाह ! बहुत खूब ! अच्छी प्रस्तुति हेतु हार्दिक आभार !

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
July 28, 2016

सादर अभिनन्दन आपका आदरणीय सद्गुरुजी ,अब आ गई हूँ कुछ दिन तो आप सब की रचनाओं का आनन्द लुंगी ,परन्तु कमेन्ट करो तो जाते ही नहीं हैं ,फिर भी कोशिस करूंगी ,रचना पर सुंदर प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार ,सादर .

Jaclyn के द्वारा
October 17, 2016

The accident of finding this post has brgtihened my day


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