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दर्द --- निर्मलासिंह गौर

Posted On: 26 Jan, 2018 Others में

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जो चहकते हैं और बातें बनाया करते हैं
उनकी ख़ामोशी बिना बात नही होतीं हैं ।
और जो खामोश रहा करते हैं ,
उनकी एक बात भी गहराई से निकलती है ।
जो बहुत कम ही खिलखिलाते हैं ,
उसकी मुस्कान बड़ी होती है उन लोगों से
जो सदा हँसते ,खिलखिलाते है ,
पर वो जो सदा हंसते हैं,खिलखिलाते हैं ,
उनकी मायूसी भी
सौ दर्द लिए होती है ।।
……………….………………..………
निर्मल

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepak pande के द्वारा
January 27, 2018

sunder rachna

Shobha के द्वारा
January 27, 2018

प्रिय निर्मला जी काफी समय बाद आपकी रचना पढने को मिली पर वो जो सदा हंसते हैं,खिलखिलाते हैं , उनकी मायूसी भी सौ दर्द लिए होती है अति सुंदर

jlsingh के द्वारा
January 28, 2018

काम से काम शब्दों में आपने जिंदगी की बहुत साड़ी पहलुओं को छुआ है. बहुत दिनों बाद आपकी संवेदनायुक्त कविता पढ़ने को मिली. सादर!

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
January 31, 2018

हार्दिक आभार जवाहर सिंह जी ,कुछ व्यस्तता थी इस बजह से ही मंच से नही जुड़ सकी ,आप सब सदैव स्म्रति में रहे,सादर धन्य वाद .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
January 31, 2018

प्रणाम शोभा जी ,वक्त नही मिलने से मंच पर नही आ सकी ,पर आप की अक्सर याद आती रही ,आपका सादर आभार .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
January 31, 2018

आपका सादर आभार दीपक जी .


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